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पिट गई गुरु चेले की जोड़ी , गांधी परिवार के करिश्मे पर लगा प्रश्न चिन्ह ?


मध्य प्रदेश में हार का दाग दामन पर लगाये दिग्विजय सिंह दिल्ली आये थे राजनीतिक निर्वासन भोगने लेकिन राहुल गांधी की राजनीतिक अंगड़ाई आते ही वे कैप्टन को किनारे करके उनके राजनीतिक गुरू और मेन्टर बन गये. उत्तर प्रदेश में मिशन राहुल गांधी के आर्किटेक्ट हो गये और लखनऊ से लेकर भट्टा पारसौल तक राहुल गांधी दिग्गी के शागिर्द नजर आने लगे थे. दलित के घर खाना खिलाने से लेकर गांव गांव पैदल दौड़ाने तक दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी से कोई कर्म बाकी नहीं छुड़वाया लेकिन जब नतीजा आया तो न केवल राहुल गांधी धराशाई नजर आये बल्कि यह भी साबित हो गया कि दिग्विजय सिंह फिलहाल तो चाणक्य होने की काबिलियत नहीं रखते हैं. उत्तर प्रदेश की जमीन गंवाने के बाद कांग्रेस के वे लोग एकबार फिर सक्रिय हो गये हैं जो दिग्विजय सिंह के कारण निष्क्रिय हो गये थे या फिर कर दिये गये थे. जनार्दन द्विवेदी और अहमद पटेल जैसे दस जनपथ के करीबियों की एक बार फिर चांदी हो गई है. सोनिया दरबार में एक बार फिर उनका महत्व बढ़ गया है इसलिए जब सोनिया गांधी प्रेस से रूबरू हुईं तो यही दो नेता हैं जो उनके आस पास नजर आये.
चुनाव के पहले राहुल के नेतृत्व में यूपी में क्रांति की बात कर रहे कांग्रेस के नेता दयनीय प्रदर्शन केलिए उनके बचाव में उतर आए हैं। वास्तव में कांग्रेस ने अपने लिए जो नतीजे सोचे थे, परिणाम उनसे भी ज्यादा खराब आए। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह तो अंदाजा था कि 60-70 सीटों का ब्रेकेट वह नहीं छू पाएगी, मगर वह 40 सीटों की आशा कर रही थी। इसीलिए, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी तक सभी नेताओं ने कहना शुरू कर दिया था कि प्रदर्शन खराब होता है तो जिम्मेदारी राहुल की नहीं होगी।
राहुल ने राज्य में लगातार 48 दिन रुककर 211 रैलियां और 18 बड़े रोड शो किए। राहुल ने पूरे प्रदेश का अभियान अपने कंधों पर ढोया तो अमेठी- रायबरेली का घरेलू किला बचाने के लिए प्रियंका को मैदान में उतार दिया। इसके बावजूद कांग्रेस-रालोद मिलकर 40 का आंकड़ा नहीं छू पाए। कांग्रेस पिछली बार 22 सीटों पर थी, इस दफा भी वह 30 सीटों से आगे नहीं जा पाई। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद खुद राहुल ने आगे आकर हार की जिम्मेदारी तो ले ली, लेकिन कांग्रेस के दूसरे नेता इसे गांधी परिवार की हार मानने को तैयार नहीं हैं। दिग्विजय सिंह ने इन नतीजों पर खुशी जताई और कहा,भ्रष्टाचारी बसपा की हार हुई है। कांग्रेस अपने गढ़ इलाहाबाद से लेकर रायबरेली तक लगभग साफ हो गई। रायबरेली से सोनिया तो अमेठी से राहुल सांसद हैं। लेकिन प्रदेश की जनता ने गांधी परिवार के हवाई करिश्मे को जिस तरह से नकारा है, उसके केंद्र तक में खासे प्रभाव पड़ेंगे।

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