GST जीएसटी क्या कृषि क्षेत्र का राष्टीय लक्ष्य हासिल कर सकेगी ?

भारतीय कृषि : जीएसटी फ्रेमवर्क में

नवीन पी सिंह और जयप्रकाश बिसन
कर नीतियां सरकार के लिए दोहरा

राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने के महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक हैं. ये है – आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि को स्थायित्व प्रदान करना. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में परोक्ष कर नीति में सरकार द्वारा हाल में किया गया सुधार आदर्श और परिवर्तनकारी लगता है. कर का दायरा बढऩे, कर प्रणाली में प्रचालनगत और ढांचागत खामियां दूर करने और कम उत्पादक से अधिक उत्पादक क्षेत्रों में संसाधनों के पुनर्वितरण जैसी विशेषताओं को देखते हुए यह कर प्रणाली सरकार का राजकोषीय घाटा कम करने में मददगार सिद्ध होगी. वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में जीएसटी एक मंत्र बन गया है और सरकारी अधिकारी, नीति निर्माता तथा आमजन अर्थव्यवस्था और इसके प्रभावों को लेकर आशंकित हैं. परंतु, कृषि क्षेत्र पर जीएसटी के प्रभावों के बारे में दो तरह की विचारधाराएं विकसित हुई हैं, जिन्हें भ्रांतियंों और वास्तविकता के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. इस आलेख में भ्रांतियंों और वास्तविकताओं पर एक साथ विचार करने का प्रयास किया जाएगा और कृषि क्षेत्र पर इसके प्रभावों को लेकर तथ्यहीन चीजों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा. वर्तमान आलेख को दो भागों में बांटा गया है – भ्रांतियां और वास्तविकताएं. इन दोनों धारणाओं पर विचार करने के बाद अंत में निष्कर्ष दिया गया है. इसे केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित रखा गया है और डेरी फार्मिंग, पोल्ट्री फार्मिंग, स्टॉक ब्रीडिंग, लकड़ी या घास कटाई, फल एकत्र करना, कृत्रिम वन उगाना या पौध अथवा पादप तैयार करना, जैसे क्षेत्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है (क्योंकि कृषि की परिभाषा में मॉडल जीएसटी अधिनियम में इन चीजों को शामिल नहीं किया गया है).
कृषि क्षेत्र पर जीएसटी का प्रभाव: भ्रांतियां और वास्तविकताएं
जीएसटी लागू होने के साथ ही कृषि क्षेत्र पर उसके प्रभावों के बारे में अनेक भ्रांतियां पैदा हुई हैं और उनमें किसी एक या अन्य पक्ष की अनदेखी किए जाने के कारण विभिन्न हितभागियों की मानसिकता को प्रभावित किया है.
इन भ्रांतियों में निम्नांकित शामिल हैं:
*जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद विभिन्न उर्वरकों के दाम बढ़ेंगे.
*जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के मूल्य में वृद्धि होने के कारण कार्बनिक खेती पर नकारात्मक असर पड़ेगा.
*जीएसटी लागू होने के बाद पादप संरक्षण रसायनों के इस्तेमाल में कमी आएगी.
*लघु-सिंचाई पद्धतियों पर प्रभाव स्पष्ट नहीं है.
*जीएसटी लागू होने के बाद कृषि मशीनरी के दाम बढऩे से कृषि यंत्रीकरण की लागत बढ़ जाएगी.
*कृषि सेवाओं के मूल्य यथावत बने रहेंगेे चूंकि कृषि सेवाओं को जीएसटी से बाहर रखा गया है.
*जीएसटी लागू होने से कृषि जिंसों के मूल्य में वृद्धि होगी.
*कृषि आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ेगा चूंकि लॉजिस्टिक सेवाओं पर जीएसटी के अंतर्गत कर लगेगा.
*जीएसटी से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में कमी आएगी.
कृषि क्षेत्र में जीएसटी के प्रभावों के बारे में वास्तविकताएं
मूल्य संवर्धित कर (वैट), और उत्पाद शुल्क तथा जीएसटी कराधान व्यवस्था के अंतर्गत कृषि जिंसों पर कर की दरों का व्यापक अध्ययन करने के बाद हमने ऊपर वर्णित भ्रांतियों का उत्तर देने और इन भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया है.
उत्पाद और वैट व्यवस्था में उर्वरक उद्योगों को विभिन्न प्रकार की छूट/रियायतें दी गई हैं. इसे देखते हुए उर्वरक उत्पादों पर कुल कर तैयार उर्वरक उत्पादों के मूल्य का करीब 5-10 प्रतिशत होगा. परंतु, जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद उर्वरकों को 5 प्रतिशत की कर स्लैब में रखे जाने से उर्वरकों पर समग्र कर में 2 से 3 प्रतिशत तक कमी आएगी. नतीजतन यूरिया, डाई-अमोनिया फास्फेट (डीएपी) और म्यूरेट आफ पोटाश (एमओपी) जैसे उर्वरकों पर कर का बोझ क्रमश: रु 6, 11 और 18 प्रति बैग कम होने की उम्मीद है. उर्वरकों के मूल्य में महत्वपूर्ण कमी के परिणाम स्वरूप उनका इस्तेमाल बढऩे की संभावना है जिसकी परिणति फसल उत्पादन में वृद्धि के रूप में होगी.
दूसरी ओर, जीएसटी के कार्यान्वयन से पहले सूक्ष्म पोषक उर्वरकों पर कर की दरें विभिन्न राज्यों में अलग अलग (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पंजाब में क्रमश: 4, 6, 5.5, शून्य और शून्य प्रतिशत) थीं परंतु, जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद की कर दरों से कम थीं. सूक्ष्म पोषक उर्वरकों को 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब में रखे जाने से उनके मूल्य में जो बढ़ोतरी होगी, वह इन पोषक तत्वों की कमी वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक उर्वरकों के इस्तेमाल में प्रतिरोधक का काम करेगी परंतु इससे अनियंत्रित इस्तेमाल वाले क्षेत्रों में न्यायोचित अनुप्रयोग को बढ़ावा मिलेगा.
यह कहना युक्ति संगत नहीं है कि जीएसटी के कार्यान्वयन से कार्बनिक खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि कार्बनिक खेती में प्रयुक्त सामग्री अर्थात् जैव-उर्वरकों, जैव-कीटनाशकों, जैव-उत्प्रेरकों को जीएसटी प्रणाली में किसी कर स्लैब में परिभाषित नहीं किया गया है. यदि किसी अन्य कारण से इन पदार्थों के मूल्यों में वृद्धि होती है तो उसका दोष जीएसटी को देना न्यायोचित नहीं है. परन्तु ब्रैंडिड फार्म यार्ड मैन्योर (एमएमवाई) अर्थात् ब्रैंडिड कार्बनिक खाद पर जीएसटी के अंतर्गत 5 प्रतिशत की दर से कर लगाया गया है! परन्तु ब्रैंडिड एफएमवाई का उपयोग शहरी क्षेत्रों में बागवानी तक सीमित है और फसल उत्पादन में कार्बनिक खाद की कुल खपत नगण्य हो सकती है. न तो वाणिज्यिक कार्बनिक फार्मों द्वारा और न ही किसानों द्वारा फसल उगाने के लिए ब्रैंडिड एफएमवाई का उपयोग किया जाता है.
अत: वाणिज्यिक फसल उत्पादन में कार्बनिक खेती पद्धतियों के इस्तेमाल पर जीएसटी का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.
कीटनाशक, खरपतवारनाशक, रोडेंट यानी कृंतकनाशक जैसे पादप संरक्षण रसायन आधुनिक खेती प्रणाली का अपरिहार्य हिस्सा हैं. परन्तु उनका निरंतर और अत्यधिक इस्तेमाल कई चिंताजनक समस्याओं को जन्म देता है, जैसे मृदा में अवशेष संचित होना, जैव-आवर्धन और कृषि पारिस्थितिकी प्रणाली से लाभदायक जीव-जन्तुओं की हानि. पादप संरक्षण रसायनों पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत होने से उनके अत्यधिक इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और उनके विवेक सम्मत इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा. इससे न केवल इन रसायनों के दाम बढऩे पर अंकुश लगेगा बल्कि पर्यावरण और जैवविविधता को भी लाभ पहुंचेगा. दूसरी तरफ, महाराष्ट्र ने पादप संरक्षण रसायनों पर जीएसटी की दर में 0.5 प्रतिशत की कमी करने का निर्णय किया है, जो जीएसटी से पहले 18.5 प्रतिशत थी. पादप संरक्षण रसायनों को लेकर हाल ही में देश के कुछ भागों में जो असंतोष दिखायी दिया, उसे इन पदार्थों के ऊंचे मूल्यों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए बल्कि उसका कारण उनकी गुणवत्ता थी. यह भली-भांति स्वीकृत तथ्य है कि किसान पादप संरक्षण रसायनों के लिए उच्चतर मूल्य अदा करने के लिए तैयार हैं बशर्ते उनकी गुणवत्ता तत्संबंधी निर्धारित मानदंड के अनुरूप हो.
सूक्ष्म-सिंचाई युक्तिसंगत खेती पद्धतियों का महत्वपूर्ण घटक होने के नाते खेती में संसाधनों के किफायती इस्तेमाल को बढ़ावा देती है. संसाधनों की इस्तेमाल सक्षमता में वृद्धि के अलावा, सूक्ष्म-सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली) ऊंचे-नीचे भूभागों में सिंचाई की एक किफायती कार्यनीति है.)
यह सच है कि हाथ से की गई जुताई/मवेशी संचालित जुताई और विद्युत संचालित जमीन की तैयारी में काम आने वाले उपकरणों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो केन्द्रीय उत्पाद और वैट प्रणाली के अंतर्गत कर-मुक्त थे. परन्तु, यह उल्लेखनीय है कि भारत में प्रमुख फसलों, जैसे धान, गेहूं, गन्ना, कपास और मक्का, की खेती के यंत्रीकरण में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर की प्रमुख भूमिका है और इनमें से ट्रैक्टर की अगुवाई में हो रहा यंत्रीकरण अधिक महत्वपूर्ण है. जीएसटी व्यवस्था के अंतर्गत ट्रैक्टरों और पावर टिलरों पर संचयी कर की दर में विभिन्न राज्यों में 4.5 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत तक की कमी आयी है. दूसरी तरफ सिंचाई के लिए पानी निकालने के काम आने वाले सेंट्रिफ्यूगल पंप उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 3.5 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत तक सस्ते हो गए हैं. दूसरी तरफ पादप संरक्षण उपकरण जैसे स्प्रेयर और डस्टर पर जीएसटी व्यवस्था में कर की दर बढ़ गई है यह ध्यान देने की बात है कि जीएसटी लागू होने के बाद छोटे कृषि उपकरणों की लागत में बढ़ोतरी की तुलना में भारी कृषि मशीनों के मूल्यों में कमी अधिक आयी है.
यह अर्धसत्य है कि कृषि सेवाओं को जीएसटी से बाहर रखे जाने के कारण कृषि सेवाओं की लागत यथावत् रहेगी. कृषि सेवाओं में निम्नांकित शामिल हैं – क) खेती से संबंधित सेवाएं (किसी भी फसल की पैदावार से प्रत्यक्ष रूप में जुड़े कृषि कार्य, जो कृषि फसल के बुनियादी स्वरूप को नहीं बदलते हैं परन्तु, उन्हें प्राथमिक बाजार के लिए क्रय-विक्रय योग्य बना देते हैं; खेती के काम से संबद्ध मशीनों या प्रचालन के लिए अपेक्षित भवन सहित या भवन रहित कृषि भूमि को किराए पर देना; द्वितीयक विपणन कार्य; कृषि विस्तार सेवाएं; किसी कृषि उपज विपणन समिति या बोर्ड या कमीशन एजेंट द्वारा खेती की पैदावार की खरीद-फरोख्त के लिए प्रदान की गई सेवाएं, आदि), ख) कृषि सहायता सेवाएं (बैंकिंग, बीमा और गोदाम और परिवहन) और ग) अनुसंधान एवं विकास सेवाएं.
परोक्ष कर की वर्तमान नीति कृषि सेवाओं को आंशिक रूप में छूट प्रदान करती है और ऊपर वर्णित अनुसंधान एवं विकास सेवाओं जैसी कुछ सेवाओं का कर के दायरे में रखती है.
ताजा या कच्चे रूप में उपभोग की जाने वाली कृषि वस्तुएं जैसे फल और सब्जियां, दूध और रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं जैसे चीनी, मिल्ड राइस, गेहूं का आटा और दालें आदि, जो किसी ब्रैैंड के तहत नहीं बेची जा रही हों, जीएसटी के अंतर्गत कर से मुक्त जिंसों की श्रेणी में रखा गया है. परन्तु, कोई भी ऐसी कृषि वस्तु, जो गहन प्रसंस्करण से गुजरने के बाद अनिवार्यत: अपना स्वरूप बदल लेती है, जैसे चाय, कॉफी, बेकरी उत्पाद और ऐसे उद्योगों की अन्य वस्तुओं, जो कृषि क्षेत्र से कच्चा माल लेते हैं, पर विभिन्न श्रेणियों के तहत जीएसटी लगाया गया है. इस प्रकार यह ध्यान देने की बात है कि जीएसटी लागू होने से कृषि जिंसों के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं होने जा रही है. दूसरी ओर 2016 में समग्र एफएमसीजी उद्योग में खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी मात्र 19 प्रतिशत है. इसका यह अर्थ है कि भारत में खाद्य व्यापार का अधिसंख्य हिस्सा ब्रैंड रहित असंगठित क्षेत्र में संचालित किया जा रहा है. अत: ब्रैंडिड खाद्य वस्तुओं को छोड़ कर जीएसटी की वजह से कृषि जिंसों के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी.
यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि अनेक सेवाओं के कर के दायरे में आ जाने से छोटे कस्बों में छोटे व्यापारियों के मामले में खेती की वस्तुएं महंगी हों जाएंगी. परन्तु, वास्तव में जीएसटी लागू होने के बाद लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन की लागत में कमी आयी है. यह उम्मीद की जा रही है कि जीएसटी व्यवस्था में अंतर-राज्यीय जांच चौकियों पर खर्च होने वाला करीब 20 प्रतिशत समय बचेगा और सडक़ परिवहन में सतत वाहन चालन हर रोज 80 से 100 किलोमीटर तक अधिक होगा. इससे न केवल लॉजिस्टिक की कार्यसक्षमता में सुधार आयेगा बल्कि मार्ग के दौरान खराब हो जाने वाली वस्तुओं की बर्बादी रोकने में भी मदद मिलेगी. इसके अतिरिक्त इस ई-वे बिल से न केवल माल की आवा-जाही सुगम होगी बल्कि तत्संबंधी रसीद सामान की ढुलाई के दौरान सामान के टिकट के रूप में काम करेगी और सामान वाहक की स्थिति का पता लगाने में भी मदद मिलेगी. इस तरह सामान को समय पर लक्ष्य पर पहुंचाया जा सकेगा.
देश में कृषि क्षेत्र की बढ़ोतरी पर जीएसटी का बहु-आयामी प्रभाव पड़ा है. इसने जहां एक ओर निवेश बाज़ार (जैसे उर्वरक, भूमि तैयार करने के विद्युत चालित उपकरण, मुख्य रूप से ट्रैक्टर्स और पावर टिलर्स, सिंचाई उपकरण आदि) पर रचनात्मक प्रभाव डालते हुए कृषि उपज और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण पैदा किया है, वहीं दूसरी तरफ संस्थागत चुनौतियों; आपूर्ति विषयक दबावों (जैसे टोल बूथ में अधिक प्रतीक्षा समय, कराधान की बहुलता, प्रांतीय सीमाओं पर व्यापार अड़चनें आदि) का समाधान करने में भी मदद की है, जिससे देशभर में कृषि आपूर्ति शृंखलाओं की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और कृषि उत्पाद जन-जन तक उपलब्ध हो सकेंगे. कर-बहुलता और कराधान के प्रपाती प्रभाव की समाप्ति, करों के अनुपालन में वृद्धि और संसाधनों के बेहतर आवंटन से न केवल कृषि प्रणाली की अक्षमताएं दूर होंगी, बल्कि इस क्षेत्र को तीव्र विकास के मार्ग पर लाने में भी मदद मिलेगी. अत: जीएसटी परवर्ती युग में कृषि क्षेत्र का स्थिर और संतुलित विकास होने की संभावना है.
निष्कर्ष
कराधान व्यवस्था में परिवर्तन से कृषि क्षेत्र में उच्चतर कार्यक्षमता, पारदर्शिता और अधिक कर-अनुपालन जैसे संचालकों का समावेश हुआ है, जो इस क्षेत्र को प्रारंभिक गड़बडिय़ों से बचाने में पर्याप्त सशक्त हैं. उत्पाद शुल्क और वैट व्यवस्था तथा जीएसटी व्यवस्था में कृषि क्षेत्र के तुलनात्मक अध्ययन से यह बात स्पष्ट हो गयी है कि बीज, उर्वरक, सेंट्रिफ्यूगल पंपों, टै्रक्टरों और पावर टिलर जैसे निवेश नई कर प्रणाली में सस्ते होंगे जबकि पादप संरक्षण रसायन, माइक्रोन्यूट्रिन्ट यानी सूक्ष्म पोषक उर्वरकों और हार्वेस्टरों के मूल्यों में किंचित वृद्धि संभव है, जिनकी वृद्धि संबंधी लागत अन्य निवेशों के मूल्य में कमी से होने वाले फायदों की तुलना में नगण्य है. उत्पादों की दृष्टि से विचार करें तो केवल संसाधित और ब्रैंडिड कृषि उत्पादों के दामों में मामूली बढ़ोतरी होगी. परन्तु, भारत में खाद्य वस्तुओं की खपत ताजा उत्पादों के रूप में अधिक होती है और दैनिक खपत वाली ऐसी वस्तुएं (चावल, दाल, तिलहन, चीनी आदि) जिनके प्रसंस्करण की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें कर की शून्य दर के अंतर्गत रखा गया है, इसलिए उपभोग के संदर्भ में भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. अत: जीएसटी व्यवस्था से कृषि क्षेत्र पर कोई नकारात्मक प्रभाव पडऩे की आशंका नहीं है.
(नवीन पी सिंह आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनोमिक्स एंड पालिसी रिसर्च (एनआईएपी), नई दिल्ली में प्रधान वैज्ञानिक हैं और जयप्रकाश बिसन कृषि अर्थशास्त्र डिविजन, आईएआरआई, नई दिल्ली, में पीएच.डी स्कॉलर हैं)
ई-मेल v2j25@yahoo.in आलेख में व्यक्त विचार लेखकों के निजी विचार हैं).
चित्र:गूगल से साभार.

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Smart Libraries रोजगार का नया अवसर एवं संभावना का नाम है

स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस: उत्पादक और डिजिटल साक्षरता
में अभिनव कदम

डॉ. ओ एस शेखर सिंह और प्रोफे. (डॉ.) एम टी एम खान

इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना के प्रोसेस और आदान-प्रदान के लिये हमारे सामथ्र्य में हाल की हुई प्रगति दुनिया भर में कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं और सामाजिक संरचनाओं को नया स्वरूप प्रदान कर रही हैं. पुस्तकालय डिजिटल नागरिकता के मार्ग में अग्रणी भूमिका में हैं. प्रथम स्थान वे होने चाहिएं जहां सर्वाधिक उन्नत प्रौद्योगिकियां कार्यान्वित की जाती हैं. टेक्नो-डिजिटल स्मार्ट सोसाइटी में स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस (एसएलए) की पहल, पुस्तकालय सेवाओं को अभिनव तरीके से साक्षरता सेवाओं में उनके शिक्षण हब के रूप में परिवर्तित करने के काम में तेज़ी लेकर आयेगी.
पुस्तकालय रिकॅार्डिड ज्ञान का भण्डारगृह होते हैं. ये भौतिक मीडिया है जो कि प्रौद्योगिकीय उन्नतियों और नवाचारों के साथ समय-समय पर बदलते ज्ञान को रिकॅार्ड करता है. पुस्तकालय के महत्वपूर्ण विकास को 4 बी.सी के आसपास निनेवे में किंग अशुरबानिपाल की क्ले टेबलेट लाइब्रेरी से लेकर वर्तमान स्मार्ट लाइब्रेरी तक देखा जा सकता है. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), इंटरनेट और विशेष तौर पर विश्वव्यापी वेब की खोज़ ने सूर्य के नीचे हर चीज में क्रांति पैदा कर दी है. सूचना और संचार क्रांति की शुरूआत ने कई संस्थानों के आवरण को बदल डाला है. अब हम डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं. हर तरफ ई-कैमरा, ई-डायरी, डिजिटल टेलीविजन, ई-हस्ताक्षर आदि के रूप में हमारे सामने प्रमाण हैं. साथ ही बड़े पैमाने पर सूचना को रिकार्ड, भण्डारण, पुन:प्रापण और विस्तार भी किया जाता है. समझा जाता है कि लाइब्रेरी शब्द का उद्भव लातिन शब्द ‘लाइबर’ से हुआ है जिससे आशय है इस्तेमाल के उद्देश्य के लिये व्यवस्थित रूप में पुस्तकों का रखरखाव करना.
इलेक्ट्रॉनिक सूचना तेज़ गति से वैश्विक नेटवर्क पर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल का प्रसार है. सूचना विस्फोट की देख रेख के लिये बेहतर और तीव्र नेटवर्कों के साथ-साथ अद्यतन टूल्स और तकनीकें अपेक्षित होती हैं. सूचना बहुत ही तेज़ गति से प्रसारित हो रही है. सूचना संबंधी क्षेत्र विशेषकर संग्रह, प्रोसेसिंग, भण्डारण और सूचना के विस्तार की प्रवृत्ति और परिवर्तन के परिणामस्वरूप पुस्तकालयों के स्मार्ट एप्प और पुस्तकालयों में परिवर्तन की क्रांति आई है. ये अपनी सेवाएं टूल्स और तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए प्रदान करती हैं जो कि वर्तमान स्मार्ट ई-वातावरण में अधिक प्रभावी और उपयोग अनुकूल हैं. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस एक टूल है जो कि सभी लाइब्रेरियों, विशेषकर राष्ट्रीय महत्व के पुस्तकालयों, शैक्षणिक संस्थानों के पुस्तकालयों के लिये अधिक फायदेमंद है. आज के दिन पुस्तकालय केवल पुस्तकें जुटाने के लिये नहीं हैं. वे न केवल व्यक्तियों बल्कि टीमों के लिये भी सृजनात्मक स्थान हैं. वे आर्थिक इन्क्यूबेटर्स और शिक्षण हब हैं. स्मार्ट एप्पस युक्त पुस्तकालय उपयोगकर्ताओं को उनके हाथ में मौजूद उपकरणों जैसे कि स्मार्ट फोन, टेबलेट्स की स्क्रीन पर सीधे अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं जिससे कि स्मार्ट ई-सूचना से जुड़ा जा सकता है. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस व्यक्ति विशेष की उनके रुचि के क्षेत्र के अनुरूप आवश्यकताएं पूरी करने के वास्ते तीव्र प्रौद्योगिकी विकास चक्र के जरिए काम करेंगी. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प अपनी सूचनाएं उपयोगकर्ताओं को एक क्षण में उनके स्क्रीन पर उपलब्ध करा देती हैं और उपयोगकर्ता इस सूचना को अन्य को उपलब्ध करा सकता है.
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स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प के नये अभिनव एप्लीकेशन पुस्तकालय सेवाओं और सूचना विशेषज्ञों की भूमिका के साथ-साथ उपयोगकत्र्ताओं की सूचना की भूमिका पर प्रभाव डालेगा जो कि उनकी तत्काल आवश्यकता से संबंधित है. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प एक ऐसा एप्प है जिसमें अनेक डिजिटल ई-इन्फारमेशन संसाधन हैं जो कि सर्वर से लिंक हैं और नेटवर्क के अधीन स्थापित हैं. सूचना स्रोत और उनका विस्तार पूर्णत: डिजिटाइज़ है और चाहे लाइब्रेरी हो, घर या काम पर हों एसएलए इंस्टाल करके किसी टेबलेट या स्मार्ट फोन पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प पहुंच, गति और उपलब्धता के संबंध में सूचना के विस्तार में क्रांति उत्पन्न कर रही हैं. आपको पहली बार एसएलए डाउनलोड करने के लिये इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत है. केवल उस एप्प को डाउनलोड करें जिसका आप इस्तेमाल करने जा रहे हैं और इससे जुडऩे के बाद आप सूचना प्राप्त कर सकते हैं. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प के पीछे की मूल अवधारणा सही समय पर सही उपयोगकर्ता को सही सूचना उपलब्ध कराने के लिये संसाधनों और उपलब्धता की वैश्विक हिस्सेदारी करना है. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प कुछ और नहीं बल्कि एक ऐसा एप्प है जिसका विश्वव्यापी किसी लाइब्रेरी विशेष के साथ इलेक्ट्रानिक या डिजिटल स्वरूप में सूचना के विभिन्न स्रोतों का जुड़ाव है. एसएलए को कम स्थान, प्रबंधन के लिये कम मानवशक्ति शक्ति की आवश्यकता होती है और इस तरह यह किफायती होता है.
दरअसल, वेस्टफोर्ड, न्यू जर्सी में पुस्तकालय संरक्षक अब अपने स्मार्ट फोनों को लाइब्रेरी कार्ड्स के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. कार्डस्टार एप्प संरक्षकों को अपने स्मार्ट फोनों पर उनके लाइब्रेरी कार्ड बारकोड को सेव करने में सहायक होते हैं. वे पुस्तकों के बारे में पता लगाने के लिये सीधे फोन में कोड को स्कैन कर सकते हैं. ओकविले पब्लिक लाइब्रेरी भी स्मार्ट फोन एप्प की प्रवृत्ति में शामिल हो रही है और एक ऐसा एप्प प्रस्तुत कर रही है जिससे संरक्षक अपने अकाउंट्स तक पहुंच जाते हैं. संरक्षक वस्तुओं को धारण, नवीकृत कर सकते हैं, पुस्तकालय के घण्टों की जांच कर सकते हैं, कलेक्शन का पता लगा सकते हैं और ई-बुक्स तथा ऑडियो बुक्स को डाउनलोड कर सकते हैं. कैम्ब्रिज लाइब्रेरी की वेबसाइट भी स्वत: मोबाइल उपकरणों से जुड़ जाती है. कैम्ब्रिज भी एक एप्प प्रस्तुत करती है परंतु यह केवल आगामी इवेंट्स की जानकारी प्रदान करती है. एब्सकोहोस्ट, एक वेब एप्प कई डाटाबेसों जैसे कि साइइन्फो, एरिक और एकेडमिक रिसर्च प्रीमियर का एक्सेस प्रदान करती है. यह आईफोन और एंड्रायड एप्प दोनों उपलब्ध कराती है जो कि मोबाइल वर्जन की तुलना में आसान लॉग-इन उपलब्ध कराती है. एप्प डाउनलोड करने के बाद आपको डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए एक एबस्को डाटाबेस को खोलने की जरूरत होती है. वल्र्डकैट, दर्जनों देशों में 10,000 से अधिक पुस्तकालयों का कलेक्शन धारण करने वाली विश्वव्यापी कैटलॉग है. वल्र्ड कैट के आईफोन एप्प और वेब एप्प दोनों हैं.
भारतीय अकादमिक पुस्तकालयों का टेबलेट्स/स्मार्ट फोन, ओसीबी (वर्चुअल हेल्प डेस्क) जैसे स्मार्ट उपकरणों के लिये एसएलए (स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस) द्वारा नई अभिनव सेवाओं से स्क्रीन पर सूचना उपलब्ध करवाने के अद्यतन टूल्स और तकनीकों के जरिए डिजिटाइज करने की आवश्यकता है. हमारे देश में कुछेक अकादमिक पुस्तकालय अब स्मार्ट सेवाओं की तरफ बढ़ रहे हैं. मानव संसाधन विकास मत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित और आईआईटी खडग़पुर द्वारा समन्वित नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ने हाल में स्मार्ट उपकरणों से अपना एनडीएल एप्प शुरू किया है जहां लोगों के लिये ई-सूचना और ई-संसाधन उपलब्ध हैं, ये हैं डीएलआई (5,00,000 से अधिक क्लासिक पुस्तकें), लिब-रिवोक्स (2 लाख से अधिक ऑडियो पुस्तकें), एसएनएलटीआर (रबीन्द्र नाथ ठाकुर के साहित्य का डिजिटाइजेशन), कृषिकोष (कृषि पर 50,000 से अधिक पुस्तकें, जर्नल्स, आलेख और प्रतिवेदन), एनपीटीईएल (मा.सं.वि. मं. द्वारा प्रायोजित परियोजना जिसमें 10,000+ इंजीनियरिंग विषयों के विडियो लेक्चर हैं) और वर्तमान में 412096 मदें हैं जो कि एनडीए के इस्तेमाल के प्रति लोगों, विशेषकर शोधकर्ताओं और छात्रों की रुचि को बढ़ा रहा है जिन्हें इन मूल्यवान ई-सूचना संसाधनों की आवश्यकता है. सरकार को कुछ ई-अकादमिक स्मार्ट एप्प शुरू करने के लिये कदम उठाने के साथ-साथ सभी शैक्षणिक संस्थानों को उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं पर आधारित अपने लाइब्रेरी एप्प शुरू करने के लिये निदेशित करना चाहिये जो कि लाइब्रेरी से ई-फॉर्म में सब्सक्राइब और एक्सेस प्राप्त कर सकें और वेब पर उपलब्ध ई-संसाधनों से जुड़ सकें जो कि संकायों, शोधकत्र्ताओं और छात्रों द्वारा प्रयोग में लाये जाते हैं, जैसे कि ई-पीजी पाठशाला (मा.सं.वि.मं. की स्नातकोत्तर स्तर पर 71 विषयों में ई-सामग्री विकसित करने के लिये आईसीटी के जरिए शिक्षा पर इसके राष्ट्रीय मिशन के अधीन परियोजना), वर्चुअल लैब्स, एक दृष्टिकोण, शिक्षक से बात करें (पुरस्कार विजेता स्वदेशी निर्मित मल्टी-मॉडल, मल्टी मीडिया ई-लॄनग प्लेटफार्म जो कि व्यापक ई-लॄनग अनुभव प्रदान करता है), स्पोकन टयूटोरियल, वीएलई (वर्चुअल लॄनग एन्वायरमेंट, स्नातकपूर्व और स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाये जाने वाले कई विषयों की जरूरत को पूरा करने वाले ई-संसाधनों का ऑनलाइन वातावरण), ई-कल्प (डिजिटल लॄनग वातावरण के सृजन संबंधी एक परियोजना) आदि. यह भारतीय छात्रों का अपने अध्ययन और शिक्षण के प्रति रूझान पैदा करेगा. यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि परंपरागत प्रणालियां ई-सिस्टम्स और वर्चुअल लॄनग सिस्टम्स में परिवर्तित हो रही हैं.
स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस टेक्नो डिजिटल स्मार्ट युग में पठन-पाठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. ये जब भी अपेक्षित होगा बहुत ही आसानी से स्मार्ट फोनों और टेबलेट्स में डाउनलोड और इंस्टाल किये जा सकेंगे. अत: सूचना सेवाएं चारदीवारी के भीतर तक सीमित होकर नहीं रहेंगी बल्कि ग्रामीणों से लेकर उन्नत लोगों तक सभी के लिये स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्कों के साथ समेकित हो जायेंगी. अकादमिक पुस्तकालय डा. एस आर रंगनाथन द्वारा प्रदान किये गये पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के मंत्र अर्थात ‘‘हरेक उपयोगकर्ता और हरेक पाठक का अपनी पुस्तक के लिये समय बचाएं‘‘ हासिल करने के लिये इस सरल अभिनव कदम से लाइब्रेरी एप्प सेवाएं अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती हैं.
स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प (एसएलए) की विशेषताएं:
संरचित सूचना जिसे एसएलए के जरिये उपलब्ध कराया जाता है , डिजिटल ई-ऑब्जेक्ट पुकारा जाता है जिसमें ई-पाठ, ई-ऑडियो, ई-विडियो, ई-फोटोग्राफ, ई-चित्र, ई-ड्राइंग्स, ई-कम्प्यूटर प्रोग्राम्स, ई-आर्ट वक्र्स, ई-व्याख्या, ई-संख्याडाटा, ई-कोस्मोलोजिकल डाटा, डिजिटाइज़्ड ई-साउण्ड, ई-ग्राफिक्स और डिजिटल ई-फार्म में मल्टीमीडिया अवयव शामिल हैं. एसएलए के लिये नि:संदेह डिजिटल स्मार्ट उपकरण जैसे कि टेबलेट्स, स्मार्ट फोन आदि और वेब प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होती है. इसके अलावा परंपरागत और सामान्य कार्य के कम्प्यूटरीकरण के लिये निम्नलिखित फ़ीचर्स रखने ही होंगे:
*विभिन्न डिजिटल वस्तुओं को लिंक उपलब्ध करवाना
*राष्ट्रीय आंदोलन ‘डिजिटल इंडिया‘ को समर्थन
*प्रचार समर्थन और ई-सूचना का एकीकरण
*एक स्मार्ट एप्प पुस्तकालय, घर में या काम पर कहीं भी उपलब्ध फार्मेट में सूचना की पहुंच के अवसर प्रदान करता है.
*संग्रह विकास, संयोजन, पहुंच और संरक्षण के परंपरागत पुस्तकालय मिशन को समर्थन
*प्राथमिक और माध्यमिक दोनों ही व्यापक सूचना संग्रह तक पहुंच प्रदान करता है.
*सर्च और रिट्रीवल इंटरफेस को समर्थन और उपलब्धता
*एसएलए से बड़ी मात्रा में दुर्लभ और ख़र्चीली सामग्री की दूरस्थ पहुंच के जरिए इस बाधा के दूर होने की
आशा है.
*उपयोगकर्ता की पहुंच में सुविधा के लिये एसएलए को शक्तिशाली उपयोग अनुकूल इंटरफेस प्रभावी खोज और रिट्रीवल उपलब्ध कराना चाहिये.
*हैंडलिंग, खोज़बीन और प्रबंधन में आसानी
*डिजिटाइज़्ड ई-उपकरणों से साफ-सुथरी हार्ड प्रति का पुन: उत्पादन जिससे समय की बचत होती है.
*अनौपचारिक शिक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
वितरित सूचना केे व्यापक सृजन और प्रयोग के लिये अधिक से अधिक लोगों को समर्थ बनाने में पुस्तकालयों में शोध अनिवार्य है. पुस्तकालय में डाटा के टेराबाईट के प्रबंधन के लिये तीव्र सूचना खोज संगणन क्षमता और नेटवर्क से जुड़ी होती है जिस तक पूर्ण पहुंच की आवश्यकता है जिसकी अभी तक मानवीय पैमाने पर कम पहुंच है. स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प आपके हाथ में स्मार्ट स्क्रीन की मदद से मिनटों में इस्तेमाल करने और कार्य को पूरा करने के लिये तीव्र और तेज़ी से लिंक प्रदान करता है. सूचना समाज को बेहतर बनाने के लिये सरकार को ई-संसाधनों और सेवाओं के लिये विशेषकर अकादमिक संस्थानों (प्राथमिक से उच्चतर) के लिये नये अद्यतन औज़ार और अनुप्रयोग के वास्ते पर्याप्त वित्त और अन्य सुविधाएं प्रदान करनी चाहिये. दरअसल, अकादमिक पुस्तकालय/संस्थानों (विशेषकर राष्ट्रीय महत्व वाले) को अपने ई-कलेक्शन, वेब और ओपन वेब संसाधनों की पहुंच बढ़ाने के लिये टेबलेट्स/स्मोर्ट फोनों, ओसीबी (ऑनलाइन चैट बॉक्स) और वीएचडी (वर्चुअल हेल्प डेस्क) जैसे स्मार्ट उपकरणों के लिये एसएलए (स्मार्ट लाइब्रेरी एप्पस) जैसे और अधिक अद्यतन टूल्स और एप्लीकेशन्स विकसित करने के लिये कदम उठाने चाहिएं. यह कदम/एसएलए उपयोगकर्ताओं को सामान्य संसाधनों की अपेक्षा, जिनकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं होती है, संबंधित पुस्तकों के उपलब्ध ओपन वेब संसाधनों, ई-संसाधनों और ई-सेवाओं के इस्तेमाल के प्रति प्रेरित करेगा. सरकार को डिजिटल इंडिया 2020 के लक्ष्य को पूरा करने के लिये देश में विभिन्न पुस्तकालयों/संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, ओपन वेब संसाधनों और सेवाओं के उत्कृष्ट इस्तेमाल के लिये एनईसी एप्प (नेशनल ई-कॉर्नर) विकसित करने के लिये कदम उठाने चाहियें जो कि सामान्य फीस पर मात्र एक क्लिक की दूरी पर हैं. यह ओपन एक्सेस संसाधनों के प्रति ओपन एक्सेस और इस्तेमाल के लिये प्रोत्साहित करने में सहायक होगा. यह सच्चाई है कि इन संसाधनों का मूल्य बढ़ रहा है क्योंकि स्मार्ट लाइब्रेरी एप्प एक अनूठा है और हमारी आशाओं से अधिक इसका इस्तेमाल हो रहा है. स्थानीय समुदायों की प्रौद्योगिकीय साक्षरता में सुधार करने के लिये पुस्तकालयों को संगत प्रौद्योगिकियों जैसे कि लाइब्रेरी बुकमार्ग एंड गाइड डिवाइस, बुक डिलीवरी ड्रोन, प्रिंट पुस्तकों के लिये डिजिटल इंटरफेस, मोबाइल लाइब्रेरी सेंटर सेे, इनमें से कुछेक को चरणबद्ध रूप में, लैस किया जाना चाहिये-जिसका भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकेगा.
(शेखर सिंह, एनवीएस नोएडा में लाइब्रेरियन हैं और एम टी एम खान गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में प्रोफेसर एवं डीन, स्कूल ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फारमेशन साइंस, हैं,

कानून की पढाई और कानून की जानकारी क्या रोजगार दिला सकती है ?

कानून की पढाई और कानून की जानकारी क्या रोजगार दिला सकती है ?
विधि में रोज़गार की संभावनाएं असीमित हैं —
उषा अल्बुकर्क और निधि प्रसाद – क्या आप एक ऐसे कॅरिअर की तलाश में हैं जो आपको गोली के किसी जोखि़म से रहित भीड़भाड़ वाले रणक्षेत्र के बीचों-बीच खड़ा कर देता है? क्या आपको कोर्ट रूम में रूपांतरित होने वाले आपराधिक सीरियलों से जुड़े अभिनय को देखना अच्छा लगता है?
विधि में कॅरिअर आपके भविष्य का स$फर बन सकता है.
एलएलबी, जो कि लातिन शब्द लेगम बेक्कालॉरस से अनुदित है, एक अर्हता है जो कि बैचलर ऑफ लॉ के तौर पर जानी जाती है जबकि मास्टर डिग्री एलएलएम, लेगम माजिस्टर के तौर पर जानी जाती है.
वकीलों का अनेक प्रकार से हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव होता है. वे घर खरीदने से लेकर, इच्छा पत्र लिखने, अपराधियों पर मुकदमेबाज़ी और प्रतिवाद करने तक हर बात से जुड़े होते हैं. वे परामर्श, रणनीति, समस्या निदान, लेखन, पक्ष, बीच-बचाव अनेक तरह के कार्य करते हैं जिनकी सूची असीमित है.
पिछले कुछ दशकों में भारत में विधि व्यवसाय में एक रणनीतिक और स्थाई बदलाव आये हैं. विद्वानों की एक लंबी सूची है, जिन्होंने महानता के शिखर को छूने के लिये इस व्यवसाय को अपनाया है. वे दिन लद गये जब काली पोशाकों और कोर्ट रूम्स तक वकीलों की रोजी-रोटी सीमित हुआ करती थी. कार्पोरेट कार्यालयों से लेकर मूवीज और मीडिया में रोज़गार तक वकीलों ने परंपरागत मार्ग से सुदूर अनेक कदम रखे हैं और अब वे वास्तविक दुनिया में एक बहुत ही शानदार जीवन जी रहे हैं.
वकील क्या करते हैं?
वकील एक ऐसा व्यक्ति होता है जो विधि में एक अधिवक्ता, वकील, अटार्नी, काउंसलर के तौर पर कार्य करता है. वकील अपने मुवक्किलों को सलाह देते हैं और निजी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर कानूनी मुद्दों का समाधान उपलब्ध कराते हैं. वे कानूनों, नियमों और विनियमों की व्याख्या करते हैं और कानूनी दस्तावेज तैयार करते हैं. वे अदालतों में बहस और तर्क करते हैं तथा कानूनी मामलों में फैसले लेते हैं. वकील के तौर पर उससे ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिये विविध प्रकार की स्थितियों के अनुरूप विधि के सम्यक सिद्धांतों को लागू करने की अपेक्षा होती है.
पूर्व में विधि को एक पारिवारिक व्यवसाय के तौर पर देखा जाता था-दादा और पिता के बाद पुत्र और पुत्रियां उनके विधिक कामकाज को संभालते थे. परंतु अब परिदृश्य बदल चुका है और कोई भी जिसका इस क्षेत्र के लिये लक्ष्य और रुचि है, वे इस पाठ्यक्रम को अपना सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं. विधि व्यवसाय, लोकतांत्रिक प्रणाली का तीसरा विंग, एक बार फिर सर्वाधिक सम्मानजनक और सर्वाधिक मांग वाले कॅरिअर्स में से यह एक है जिसके तहत वकील न केवल समाचार बना रहे हैं बल्कि धन भी अर्जित कर रहे हैं. काला कोट धारण करने वाले अब दीवानी अदालतों के भीतर चक्कर लगाने वाले नहीं रह गये हैं बल्कि आज के वकील आधुनिक युग में कार्पोरेट बोर्ड रूम्स को भी चुन सकते हैं.
चूंकि विधिक व्यवस्था हमारे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकार्यों के सभी पहलुओं का व्यावहारिक नियमन करती है, अधिवक्ता विधिक रूचि के विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं. इनमें दीवानी मामले, फौज़दारी मामले, कंपनी कानून, कराधान कानून, श्रम कानून, संविधान कानून के साथ-साथ हाल में जुड़े कार्पोरेट कानून, मानवाधिकार कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून, पर्यावरणीय कानून, पेटेंट्स कानून, साइबर कानून, बौद्धिक संपदा कानून आदि शामिल हैं.
विशेषज्ञता के क्षेत्र
*दीवानी/फौज़दारी कानून
*संवैधानिक कानून
*प्रशासनिक कानून
*मानवाधिकार कानून
*परिवार कानून
*कराधान
*कार्पोरेट/बिजऩेस कानून
*अंतर्राष्ट्रीय कानून
*श्रम कानून
*रियल एस्टेट कानून
*बौद्धिक संपदा/पेटेंट कानून
*समुद्री कानून
*चिकित्सा कानून
*मीडिया कानून
और भी कई अन्य
कार्य प्रोफाइल
*मुवक्किलों से उनके विधिक विषयों को समझने और प्रबंधन के लिये मुलाकात और विचारविमर्श करना
*मुवक्किलों की विनिर्दिष्ट अपेक्षाओं के अनुरूप आधिकारिक पेपर्स, लैटर्स और व्यक्तिगत समझौते का मसौदा तैयार करना
*तथ्यों का पता लगाने के लिये मुवक्किलों और गवाहों के साथ भेंट के जरिए बचाव रणनीति तैयार करने के लिये सबूत एकत्र करना.
*व्यक्तियों और व्यवसायिकों के लिये कानूनों, व्यवस्थाओं और विनियमों का अध्ययन और व्याख्या करना
*कानूनी सिद्धांत और उदाहरणों की जानकारी का इस्तेमाल करते हुए मामलों में संभावित परिदृश्यों का विश्लेषण करना.
*निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिये मुवक्किलों और अन्य संबद्ध नेटवर्क साझेदारों के साथ वार्तालाप और लेनदेन करना.
*संविदाओं के निष्पादन और मसौदाकरण के लिये प्रबंधन और पर्यवेक्षण करना.
*ग्राहकों और विरोधी अधिवक्ताओं के साथ पत्राचार करना.
*विवादों के दौरान कोर्ट में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करना.
पात्रता
वकील बनने के लिये आपको विधि में बैचलर डिग्री अथवा बीए-एलएलबी की अर्हता प्राप्त करने की आवश्यकता होती है.
इसमें किन्हीं भी विषयों के साथ 10+2 के उपरांत 5 वर्षीय पाठ्यक्रम शामिल है.
किसी भी विषयक्षेत्र में स्नातक के बाद 3 वर्षीय विधिक पाठ्यक्रम
यद्यपि विधिक प्रैक्टिस के लिये अर्हता हेतु किसी सालिसिटर के साथ अथवा एडवोकेट फर्म के साथ एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप अपेक्षित होती है. 2 वर्ष की अप्रेंटिसशिप के बाद विधिक अप्रेंटिस बार काउंसिल द्वारा आयोजित आर्टिकल्ड क्लर्क की परीक्षा में बैठ सकता है जिससे वकील को प्रेटिक्स करने का लाइसेंस मिल जाता है.
कोई भी या तो किसी भी विषय में स्नातक के उपरांत 3 वर्षीय विधिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर सकता है अथवा 12वीं श्रेणी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत 5 वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया जा सकता है जो कि एकीकृत बीए एल एल बी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम होता है. कई विश्वविद्यालय एकीकृत पाठ्यक्रम जैसे कि बीबीए-एलएलबी, बीकॉम/बीबीए-एलएलबी और यहां तक कि बी-टैक-एलएलबी संचालित करते हैं. पांच वर्ष का पाठयक्रम करने के इच्छुक छात्रों को अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं जैसे कि कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट (सीएलएटी) में उपस्थित होना होता है. विधिक पाठयक्रमों के लिये विधिक प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है:-
*सीएलएटी-कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट, सामान्यत: जिसे सीएलएटी के तौर पर जाना जाता है, राष्ट्रीय स्तर की विधि प्रवेश परीक्षा है. आप किसी भी राष्ट्रीय विधिक संस्थानों, टीएनएनएलएस तिरुचिरापल्ली, डीएसएनएलयू विशाखापत्तनम, निरमा, अहमदाबाद आदि में कोई सीट हासिल करने के लिये 12वीं कक्षा के उत्तीर्ण करने के उपरांत इस प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं.
*एलएसएटी-लॉ स्कूल एडमिशन टैस्ट, जिसे सामान्यता एलएसएटी के तौर पर जाना जाता है, भारत में विधिक स्कूलों द्वारा प्रयोग में लाये जाने हेतु अमरीका स्थित लॉ स्कूल एडमिशन काउंसिल द्वारा तैयार किया गया पाठ्य और मौखिक रिजनिंग कौशलों की मानकीकृत परीक्षा है.
*डीयूएलएलबी/एलएलएम: विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय विभिन्न विधिक पाठ्यक्रमों नामत: एलएलबी और एलएलएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये अलग विधिक प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है.
*सेट सिम्बायसिस-सिम्बायसिस प्रवेश परीक्षा सामान्यत: एसईटी के तौर पर जानी जाती है जो कि सिम्बायसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के अधीन विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित स्नातकपूर्व पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये आयोजित की जाती है.
*यूएलएसएटी-यूपीईएस विधि अध्ययन अभिरुचि परीक्षा को सामान्यत: यूएलएसएटी के तौर पर जाना जाता है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) संचालित करती है. प्रतिस्पर्धातमक प्रवेश परीक्षा बैचलर ऑफ लॉ (बीए एलएलबी) और कार्पोरेट लॉ, साइबर लॉ और बौद्धिक संपदा अधिकार में एलएलबी के लिये प्रवेश प्रदान करने हेतु आयोजित की जाती है.
*आईपीयू सीईटी एलएलबी गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा
*बीएलएटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बीए एलएलबी प्रवेश परीक्षा
*जामिया मिल्लिया इस्लामिया विधि प्रवेश परीक्षा
*इलाहाबाद विश्वविद्यालय एलएलबी प्रवेश परीक्षा
अपेक्षित कौशल
विधि व्यवसाय में सफलता के लिये प्रमुख रूप में जिज्ञासु प्रकृति, विस्तारित ज्ञान, तार्किकता, प्रेरकता, मज़बूत निर्णय शक्ति और लेखन योग्यता जैसे कौशल होना आवश्यक है. एक सफल अधिवक्ता बनने के लिये किसी के पास अच्छा वक्ता कौशल और भाषा पर मज़बूत पकड़ होनी चाहिये. इन दिनों सक्षमता के साथ प्रभावी तौर पर विधि की प्रैक्टिस के लिये और अधिक कौशल अपेक्षित होते हैं. इनमें से कुछेक इस प्रकार हैं:-
*अच्छा सम्प्रेषण कौशल
*तीव्र प्रत्युत्तरता
*उत्कृष्ट स्मृति
*खुला और लचीला दिमाग
*अच्छे प्राधिकृत नेतृत्व गुण
*तार्किक योग्यता
*अच्छा श्रोता और शक्तिशाली सम्प्रेषण कौशल
*सभी प्रकार के कानूनों, नियमों और विनियमों तथा अधिसूचनाओं की जानकारी
*धैर्य-कुछ मामले लंबे समय तक चलते रहते हैं.
*नियमित सीखते रहने और सूचनाएं एकत्र करने की योग्यता
*तनाव-कठोर निर्णय करने की सक्षमता जो कि अक्सर ज्यादातर ट्रायल्स के दौरान लेने पड़ते हैं.
संभावना
विधि किसी भी देश में बहुत ही लोकप्रिय कॅरिअर विकल्प है और निश्चित तौर पर व्यापक कॅरिअर क्षमताओं के साथ सर्वाधिक सम्मानित व्यवसायों में से एक है. स्नातक योग्यता अर्जित करने के उपरांत एक अधिवक्ता के पास बहुत से व्यवसायिक विकल्प होते हैं. आप सरकार में, कार्पोरेट क्षेत्र में, वित्तीय संस्थाओं में, विधिक फर्म में, कंसल्टेंसी में काम कर सकते हैं अथवा निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं.
सरकार में वकील विधि सेवा आयोग अथवा राज्य लोक सेवा आयोग प्रवेश परीक्षाएं उत्तीर्ण करके भारतीय विधिक/न्यायिक सेवा अथवा राज्य विधिक सेवा में शामिल हो सकते हैं. जिनका चयन होता है वे जिला अदालत में मुन्सिफ के तौर पर कार्यभार ग्रहण करते हैं और समय के साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक अथवा न्यायिक और राजस्व विभागों में वरिष्ठ पदों तक पहुंच जाते हैं.
कोई अधिवक्ता सेनाएं चयन बोर्ड की परीक्षाओं और साक्षात्कार के जरिए रक्षा सेवाओं में जज एडवोकेट जनरल्स विभाग में विधिक शाखा के लिये आवेदन कर सकता है.
ज्यादातर अधिवक्ता विधिक फर्मों में रोज़गार प्राप्त करते हैं अथवा दीवानी और फौज़दारी मामलों, संपत्ति, उत्तराधिकार, संविदा और वाणिज्यिक मामलों, चोरी, हत्या, समाज और शासन के विरुद्ध अपराध आदि मामलों में निजी प्रैक्टिस करते हैं. अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में कर कानून, आयकर, संपत्ति कर, संपदा शुल्क आदि से संबंधित अन्य मामले अथवा श्रम कानून, किसी संगठन में प्रबंधन और श्रमिकों के बीच उत्पन्न समस्याओं को हल करने अथवा सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर, संवैधानिक कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून और कई अन्य प्रकार के मामले शामिल हो सकते हैं.
आजकल के दिनों में विधि स्नातकों के लिये कार्पोरेट से जुड़े रोज़गारों का प्रलोभन है. अब विधि स्नातकों के लिये सर्वाधिक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है. देश की कुछेक विधिक फर्में हैं: अमरचंद मैंगाल्डस, एजेडबी एंड पार्टनर्स, जे सागर एसोसिएट्स, खेतान एंड कंपनी, लुथरा एंड लुथरा. चर्चित क्षेत्र हैं: कार्पोरेट कानून, अंतर्राष्ट्रीय कराधान, साइबर कानून.
विधि स्नातकों और विधि प्रैक्टिसनर्स के लिये रोज़गार की निम्नलिखित संभावनाएं हैं:
*मुकदमेबाज़ी : मुकदमेबाज़ी से जुड़ा वकील मामले को सुनता है, मुवक्किल के लिये मसौदा बनाता है और स्वयं या एक टीम के सहयोग से मामले को अधिकरण या अदालत में लड़ता है. साथ ही बौद्धिक संपदा कानूनों, कर कानूनों, आर्बिट्रेशन और संवैधानिक मामलों के वकील भी होते हैं.
*भारतीय विधिक सेवा : विधायी विभाग में विधिक मामले और विधायी परिषद में भी विधिक सेवाओं के लिये विकल्प होते हैं.
*विधि परामर्शदाताओं के अलावा: विधि आयोग के सदस्य, सरकारी वकील, सालिसिटर्स, अटार्नी जनरल ऑफ इंडिया, विधानसभाओं में विधिक सचिवालय, कैट में न्यायिक सदस्य, बिक्री कर, आयकर, उत्पाद कर और अन्य अधिकरणों में भी दिशानिर्देशों के अनुरूप नियुक्तियां होती हैं. उन्हें भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में अदालती मामलों की कार्यवाही के लिये विधिक शाखाओं में कमीशन अधिकारियों के तौर पर भी नियुक्त किया जाता है.
*शिक्षण एवं लेखन : विधि स्नातकों के लिये प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर्स और अतिथि प्रवक्ता बनने के लिये भी संभावनाएं होती हैं.
*विधि पत्रकारिता भी इन दिनों प्रचलन
में है.
*विधि फर्में : अमरचंद मैंगाल्डस, एजेडबी, लुथरा एंड लुथरा, जेएसए, ट्रिलिगल, खेतान एंड कंपनी
*कार्पोरेट घरेलू विधि विभाग : एचयूएल, आईसीआईसीआई, आईटीसी, अर्नस्ट एंड युंग, पीडब्ल्यूसी के अपने स्वयं के विधि विभाग हैं.
*पीएसयूज : सेबी, ओएनजीसी, आईओसीएल, सेल
*लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग (एलपीओ) : पांगिया 3, ओएससी, सीपीए ग्लोबल, क्लच गु्रप
*आईपी फर्में : आनंद एंड आनंद, रेमफ्राई एंड सागर, लाल एंड सेठी
*रिसर्च : लेक्सिस नेक्सिस, मनुपात्रा
*आर्बिट्रेशन कंसल्टेंसी :
*करंजावाला, ओसिस
*चैम्बर प्रैक्टिस
*वरिष्ठ काउंसल के साथ कार्य करना
*मुकदमेबाज़ी से जुड़ी फर्में
*लाभ न कमाने वाले संगठन
*शिक्षण संगठन
परंतु अब किसी भी प्रमुख विधि विद्यालय से स्नातकों के लिये अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध हैं. भारत की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद उच्च कौशल प्राप्त वकीलों की जबर्दस्त मांग है जिन्हें विलय और अधिग्रहण, बैंकिंग और वित्त, अवसंरचना अनुबंध, ऋण पुनर्गठन, फेमा विनियमन, आईपीआर, कार्पोरेट अभिशासन, निजी इक्विटी लेन-देन, डब्ल्यूटीओ कानून आदि के लिये बहुत मांग है. छात्रों के लिये सीएसई, आईसीआरसी, यूएनएचसीआर आदि जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में पर्यावरण या मानवाधिकारों से जुड़े मामलों से जुडऩे की भी संभावनाएं हैं.
पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछेक कालेज हैं:
छात्र कक्षा 11 और 12 से ही विधि प्रवेश परीक्षाओं के लिये तैयारी कर सकते हैं. सीएलएटी के अधीन आने वाले देश भर के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों की सूची निम्नानुसार है:-
*नेशनल लॉ स्कूल इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलुरू (एनएलएसआईयू)
*नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडी एंड रिसर्च, हैदराबाद (एनएएलएसएआर)
*राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता (एनयूजेएस)
*राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय संस्थान, भोपाल (एनएलआईयू)
*हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर (एनएनएलयू)
*गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गांधी नगर (जीएनएलयू)
*राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ (आरएमएलएनएलयू)
*राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पंजाब (आरजीएनयूएल)
*चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना (सीएनएलयू)
*राष्ट्रीय उन्नत विधि अध्ययन विश्वविद्यालय, कोच्चि (एनयूएएलएस)
*राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ओडि़शा (एनएलयूओ)
*राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय, रांची (एनयूएसआरएल)
*राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और न्यायिक अकादमी, असम (एनएलयूजेए)
*राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली (एनएलयूडी) अपना स्वयं का एआईएलईटी आयोजित करती है.
इनके अलावा कुछेक विश्वविद्यालय अपने स्वयं के पेपर आयोजित करते हैं. इनमें से कुछेक हैं:-
*सिम्बायसिस लॉ स्कूल
*आईपी यूनिवर्सिटी
*एमिटी यूनिवर्सिटी
*यूपीईएस देहरादून
*अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
*जामिया मिल्लिया इस्लामिया कालेज
विधि क्षेत्र बहुत से धन और व्यापक संभावनाओं वाला एक आकर्षक व्यवसाय है परंतु इसके लिये निरंतर कठोर मेहनत करना अपेक्षित होता है. संगठन एक अच्छे टीम कार्य कौशलों, बिजनेस के तौर तरीकों, वार्तालाप कौशलों, जिम्मेदारी की अनुभूति और सीखने की इच्छाशक्ति को प्रमुखता देते हैं.
(उषा अल्बुकर्क कॅरिअर्स स्मार्ट प्रा. लिमि., नई दिल्ली में निदेशक हैं और निधि प्रसाद सीनियर काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक हैं. ई-मेल : careersmartonline@gmail.com)
इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.
चित्र: गूगल के सौजन्य से

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पूरब टाइम्स

‘लोकराज्य’च्या विशेषांकाचे पालकमंत्री शिवतारे यांच्या हस्ते प्रकाशन संपन्न


सातारा : माहिती व जनसंपर्क महासंचालनालयाच्यावतीने ‘आपले जिल्हे विकासाची केंद्रे’ हा लोकराज्य विशेषांक काढण्यात आला आहे. या विशेष अंकाचे प्रकाशन आज पालकमंत्री विजय शिवतारे यांच्या हस्ते करण्यात आले.

येथील श्रीमंत छत्रपती शाहू क्रीडा संकुलात झालेल्या प्रकाशन सोहळ्यास खासदार श्रीमंत छत्रपती उदयनराजे भोसले, जिल्हा परिषदेचे अध्यक्ष संजीव नाईक-निंबाळकर, नगराध्यक्ष डॉ. माधवी कदम, जिल्हाधिकारी श्वेता सिंघल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलास शिंदे, पोलीस अधीक्षक संदीप पाटील, उपाध्यक्ष वसंतराव मानकुमरे, प्रांताधिकारी स्वाती देशमुख-पाटील, तहसीलदार नीलप्रसाद चव्हाण, जिल्हा क्रीडा अधिकारी सुहास पाटील, शिक्षणाधिकारी (प्राथमिक) देविदास कुलाळ, शिक्षणाधिकारी (माध्यमिक) पुनिता गुरव, जिल्हा माहिती अधिकारी युवराज पाटील आदी उपस्थित होते.

आपले जिल्हे-विकासाची केंद्र या लोकराज्य विशेषांकात महाराष्ट्राच्या या स्थित्यंतराची दखल घेतली आहे. प्रत्येक जिल्ह्यात राबविण्यात येत असलेल्या, पूर्णत्वास गेलेल्या व नजीकच्या काळात सुरु होणाऱ्या विविध योजना व विकास कामांचा आढावा या विशेषांकात घेतला आहे. तसेच सातारा जिल्ह्यात झालेले आदर्श पुनर्वसन, जलयुक्त शिवार अभियानाचे यश व स्वच्छतेत प्रथम या विषयांची माहिती या लोकराज्य अंकात देण्यात आलेली आहे. तसेच सातारा जिल्ह्याची राज्यातच नव्हे तर देशात ओळख होत असलेल्या ‘पुस्तकाचं गावं भिलार’ यावरही यात विशेष प्रकाश टाकण्यात आला आहे.

‘महान्यूज’ मधील मजकूर आपण ‘महान्यूज’च्या उल्लेखासह पुनर्मुद्रित केल्यास आम्हाला आनंदच वाटेल.

शिक्षणासाठीचा निधी म्हणजे पुढची पिढी घडविण्याची गुंतवणूक – शिक्षणमंत्री तावडे


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राज्यातील कराच्या रुपातून मिळणाऱ्या प्रत्येकी 2 रुपये 40 पैशापैकी 57 पैसे आपण राज्यातील शिक्षणासाठी देतो. हा निधी म्हणजे खर्च नसून गुंतवणूक आहे, असे प्रतिपादन शिक्षणमंत्री विनोद तावडे यांनी केले.

पद्मश्री कर्मवीर भाऊराव पाटील यांच्या 130 व्या जयंतीनिमित्त आयोजित कार्यक्रमात ते बोलत होते. यावेळी रयत शिक्षण संस्थेच्या मॅनेजिंग काऊन्सिलचे सदस्य तथा आमदार डॉ. पतंगराव कदम, संस्थेचे चेअरमन डॉ. अनिल पाटील, संस्थेचे मॅनेजिंग काऊन्सिल सदस्य डॉ. एन.डी. पाटील, रयत शिक्षण संस्थेचे सचिव प्राचार्य डॉ. भाऊसाहेब कराळे, सहसचिव डॉ. विजयसिंह सावंत आदी उपस्थित होते.

श्री. तावडे म्हणाले, प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र या योजनेमुळे राज्यात 10,153 शाळांचा दर्जा सुधारला तर ऑपरेशन डिजीटल शाळा कार्यक्रमातून साठ हजार 32 शाळा डिजीटल झाल्या. ग्रामीण भागातील जिल्हा परिषदातील शाळांचा दर्जा सुधारावा यासाठी लोकांचा सहभाग घेतला. शाळा सुधारणेला चालना देण्याच्या या धोरणाला चांगला प्रतिसाद मिळाला. या लोकसहभागातून 326 कोटी रुपये उभे राहिले. त्यातून जिल्हा परिषद शाळांच्या प्रगतीला मोठा हातभार लागला. मोबाईलसारख्या नव्या तंत्रज्ञानाचा उपयोग शिक्षणात गतिमानता आणण्यासाठी वापरायची परवानगी दिली. त्यामुळे आज स्मार्टफोन ॲपमधून शिक्षकांनी नवनवे शिकविण्याचे प्रयोग करुन 1 लाख 87 हजार शिक्षक या ॲपचा उपयोग करुन विद्यार्थ्यांना शिकवत असल्याची माहितीही त्यांनी दिली.

या युगात गुणवत्ता महत्वाची आहे. त्यासाठी शिक्षणामध्ये नवनवे बदल करणे आवश्यक असून कालानुरुप बदल करण्यासाठी आपण अनुकूल आहोत. रयतसारख्या शिक्षण संस्थांना ॲकॅडमिक स्वायत्ता देण्याचा विचार होवू शकतो. या गुणवत्तापूर्ण शिक्षणासाठी झटणाऱ्या संस्था आहेत म्हणूनच आपण रयत शिक्षण संस्थेच्या गुरुकुलाला मान्यता दिल्याचेही शिक्षण मंत्र्यांनी यावेळी सांगितले. ग्रामीण आणि शहरी भागातील गुणवत्ता एकाच मापात मोजता येणार नाही. त्यासाठी आपली परीक्षा पद्धती जी घोकंपट्टीवर आधारलेली आहे. ती बदलावी लागणार आहे, हे शिक्षणमंत्र्यांनी काही उदाहरणे देवून पटवून दिले. आता महाराष्ट्रातील शिक्षणात ते बदल घडवून आणण्याचा आपला प्रयत्न राहणार असल्याचे सांगितले.

भिलारसारखे पुस्तकाचे गाव नवी मुंबई परिसरात व्हावे – आमदार मंदा म्हात्रे

वाशी येथे ग्रंथोत्सवास उत्साहाने सुरुवात

ठाणे : ठाणे जिल्ह्यातील ग्रंथोत्सवास आज वाशी येथे शाळकरी व महाविद्यालयीन विद्यार्थ्यांनी काढलेल्या दिंडीने उत्साहात सुरुवात झाली. सेक्टर सहामधील माणिकराव कीर्तने वाचनालय, साहित्य मंदिर सभागृह, येथे जिल्हा ग्रंथालय अधिकारी कार्यालयातर्फे दोन दिवसांचा ग्रंथोत्सव आयोजित केला असून आज महापौर जयवंत सुतार आणि आमदार मंदा म्हात्रे यांच्या हस्ते ग्रंथ प्रदर्शनाचे देखील उद्घाटन करण्यात आले. यावेळी बोलताना मंदा म्हात्रे यांनी नवी मुंबई परिसरात मोठ्या प्रमाणावर सुशिक्षित नागरिक राहत असून याठिकाणी भिलार गावासारखे पुस्तकाचे छोटेसे गाव उभारण्यासाठी महानगरपालिकेने पुढाकार घ्यावा, अशी सूचना केली.

आज सकाळी साडेनऊच्या दरम्यान साहित्य मंदिर सभागृहा येथून ग्रंथ दिंडी निघाली. दिंडीतील मुलांच्या हातात ग्रंथांविषयीचे विविध फलक होते तसेच बँड पथकामुळे वातावरण निर्मिती झाली होती. शिवाजी चौकात ही दिंडी विसर्जित झाली. यात मॉडर्न स्कूल, आयसीएल कॉलेज, न्यू बॉम्बे हायस्कूल, ज्ञानविकास विद्यालय व कनिष्ठ महाविद्यालय यांनी सहभाग घेतला होता.

यानंतर सभागृहात झालेल्या कार्यक्रमात महापौर जयवंत सुतार यांनी सांगितले की, नवी मुंबई परिसरातील २२ ग्रंथालयांच्या माध्यमातून ६० हजार पुस्तके उपलब्ध असून अतिशय चांगला प्रतिसाद आहे. स्पर्धा परीक्षांच्या तयारीसाठी देखील मुलांना याचा फायदा होतो, असे ते म्हणाले. जिल्हा माहिती अधिकारी अनिरुध्द अष्टपुत्रे यांनी मराठी ग्रंथ संग्रहालयातील दुर्मिळ पुस्तकांचे डिजिटलायझेशन जिल्हा प्रशासनाच्या मदतीने सुरु असल्याबाबत माहिती दिली. कोकण विभाग ग्रंथालय संघाचे अध्यक्ष राजेंद्र वैती सहायक ग्रंथालय संचालक शालिनी इंगोले तसेच माणिकराव कीर्तने वाचनालयाचे अध्यक्ष सुभाष कुलकर्णी यांनीही आपले विचार मांडले. प्रास्ताविक जिल्हा ग्रंथालय अधिकारी सुहास रोकडे यांनी केले तर शेखर पाटील यांनी आभार मानले. सूत्रसंचालन दिलीप जांभळे यांनी केले.

२३ नोव्हेंबर रोजी सकाळी प्रशासन सेवा- जनसेवेची उत्तम संधी या विषयावर पोलीस उपयुक्त संदीप भाजीभाकरे तसेच माहिती उपसंचालक डॉ. गणेश मुळे हे विचार मांडतील. यानंतर मराठवाडा विनोदी एक्स्प्रेसचे डॉ. विष्णू सुरासे यांचा हास्यरंग कार्यक्रम होईल. सायंकाळी या ग्रंथोत्सवाचा समारोप चांगदेव काळे, अरुण म्हात्रे आणि माणिकराव कीर्तने वाचनालयाचे अध्यक्ष सुभाष कुलकर्णी यांच्या उपस्थितीत होईल.

महाराष्ट्राची लोककला देशाला भुरळ पाडणारी – केंद्रीय राज्यमंत्री आठवले


आंतरराष्ट्रीय व्यापार मेळ्यात ‘महाराष्ट्र दिन’ साजरा

नवी दिल्ली : महाराष्ट्राची लोककला ही समृध्द असून संपूर्ण देशाला या लोककलेने भुरळ घातली आहे असे गौरवोद्गगार केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले यांनी काढले.

येथील प्रगती मैदानावर ३७ व्या भारतीय आंतरराष्ट्रीय व्यापार मेळाव्यात आयोजित ‘महाराष्ट्र दिना’ चे उद्घाटन श्री. आठवले यांच्या हस्ते झाले, यावेळी ते बोलत होते. निवासी आयुक्त तथा सचिव आभा शुक्ला, गुंतवणूक व राजशिष्टाचार आयुक्त लोकेशचंद्र, अपर निवासी आयुक्त समीर सहाय,सहायक निवासी आयुक्त सूमन चंद्रा तसेच, महाराष्ट्र लघु उद्योग विकास महामंडळाचे वरिष्ठ अधिकारी यावेळी उपस्थित होते.

श्री. आठवले म्हणाले, लावणी, दिंडी नृत्य, कोळी नृत्य आदी महाराष्ट्रातील लोककला या देशाला भुरळ पाडणाऱ्या आहेत. राज्याला नररत्नांप्रमाणेच लोककलेचीही मोठी परंपरा असून ही परंपरा देशाला समृध्द करणारी आहे. महाराष्ट्रातील लोककलेमध्ये राज्याच्या वैविध्यपूर्ण संस्कृतीचे दर्शन घडते. आज भारतीय आंतरराष्ट्रीय व्यापार मेळाव्यातील महाराष्ट्र दिनाच्या माध्यमातून ही लोककला देश-विदेशात पोहचत असल्याचा अभिमान वाटतो.

महाराष्ट्राच्या समृध्द सांस्कृतिक वारशाचे दमदार सादरीकरण

महाराष्ट्र दिनानिमित्त आयोजित ‘एक माती अनेक नाती’ कार्यक्रमातील गण-गौळण, शेतकरी नृत्य, खान्देशी नृत्य, दिंडी, अभंग, वासुदेव आदी लोककलांच्या माध्यमातून महाराष्ट्राच्या समृध्द सांस्कृतिक वारशाच्या दमदार सादरीकरणाने प्रगती मैदानात उपस्थित देश-विदेशातील प्रेक्षकांची मन जिंकली.

भारतीय आंतरराष्ट्रीय व्यापार मेळाव्यात दररोज सायंकाळी ‘हंसध्वनी सभागृह’ येथे व्यापार मेळाव्यात सहभागी देश व राज्यांच्या सांस्कृतिक कार्यक्रमांचे सादरीकरण होते. या अंतर्गत व्यापार मेळाव्याच्या दहाव्या दिवशी आज ‘महाराष्ट्र दिन’ साजरा करण्यात आला.

मुंबई येथील ‘हृदया आर्ट गृप’ च्या ४० कलाकारांनी ‘एक माती अनेक नाती’ या कार्यक्रमाचे सादरीकरण केले. गणेश वंदनेने या कार्यक्रमाची सुरुवात झाली. महाराष्ट्राच्या ग्रामीण भागातील पहाटेचे दर्शन घडविणारे “उगवला सूर्य नारायण…”,“ऐरणीच्या देवा….” , तसेच, पंढरपूरच्या वारीचे दर्शन घडविणारे दिंडी नृत्य सादर करण्यात आले. थेट प्रेक्षकांमधून निघालेली वारकऱ्यांची दिंडी पाहून उपस्थितानी उभे राहून दिंडीला मानवंदना दिली. शेतकरी नृत्य, खान्देशी नृत्य या लोककलांच्या सादरीकरणाने येथे उपस्थित देश-विदेशातील रसिक प्रेक्षकांच्या टाळ्या मिळवल्या. महाराष्ट्राच्या कडाकपारीत राहणाऱ्या ठाकर जमातीचे दर्शन घडाविणारे नृत्य, संताचे अध्यात्मिक विचार उलगडणारे भारूड आदींनी रसिकांच्या मनाचा ठाव घेतला. विविध लोककला व लोकनृत्यांचा आविष्कार असणाऱ्या या कार्यक्रमात महाराष्ट्राचे प्रतिबिंबच उभे राहिले आणि यास उपस्थितांचा भरभरून प्रतिसाद लाभला.
‘महान्यूज’ मधील मजकूर आपण ‘महान्यूज’च्या उल्लेखासह पुनर्मुद्रित केल्यास आम्हाला आनंदच वाटेल.